शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

'' समय का फेर ''

  







                                  '' समय का फेर ''

कीमती से कीमती खिलौने भी पल भर में
आजकल के बच्चे झटके में तोड़ डालते हैं
सस्ते से सस्ते खिलौने भी शिद्दत से हम
अपने बच्चों के सहेज कर रखते ही रह गये
कहीं लोप ना हो जाये बालपन की निशानियाँ
अलमारियों पर हसरत से सजाते ही रह गए
कितनी दूर हो गए आज हृदय के टुकड़े मेरे
पर इन्हीं खिलौनों से आज भी झांक जाते हैं
बच्चों के बचपन के चंचल सुखद पल सुनहरे ।

                                       शैल सिंह 

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