ग़ज़ल
यूँ तो मुक़द्दर से शिक़वा बहुत
ज़िन्दगी तूं हमेशा महकती रहे
तेरे बिंदास मिज़ाज पर जिंदगी
ग़मे मौसम इरादा बदलती रहे।
ठोकरों से मिली नसीहत बहुत
रख अधर आबोताब हँसती रहे
थक जाएँगी बुरी नीयतें जिन्दगी
ठोकरें खुद तबियत बदलती रहें।
हर लमहा रखना गुमां का जेहन
दर आने को रौशनी मचलती रहे
शमां खुद्दारियों की बुझने न देना
खुद दस्ते-सितम हाथ मलती रहे |
दस्ते-सितम --सताने वाला हाथ
शैल सिंह
दर आने को रौशनी मचलती रहे
शमां खुद्दारियों की बुझने न देना
खुद दस्ते-सितम हाथ मलती रहे |
दस्ते-सितम --सताने वाला हाथ
शैल सिंह
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें