रविवार, 14 मई 2017

हिंदी ग़ज़ल '' इस कदर चुप ना तनहा रहा कीजिये ''

हिंदी ग़ज़ल  '' इस कदर चुप ना तनहा रहा कीजिये ''

आजकल लोग हँसने में भी कंजूसी करते हैं ,मनहूस जैसी शक्ल बनाये सामने वाले को भी मनहूस कर देते हैं ,उसी विषय पर सरल भाषा में मेरी ये एक हिन्दी गजल की कोशिश पेश है |



हँसी सांसों में घोल सरगम की तरह
हँसाईए औरों को खुद हँसा कीजिये ,

उदासियों में हँसी की वजह ढूँढकर
खुशनुमा ज़िन्दगी फिर बना लीजिए
कर कमबख्त ख़ामोशियों को दफ़ा
खूब असल ज़िंदगी का मजा लीजिए ,

ग़र्दिशे दर्द जख़्म हों हँसी पर फ़िदा
बिछा चौसर हँसी का जिया कीजिए
कितनी सस्ती हँसी हँसते-हँसते हुए
इसमें डुबकी लगा कर नहा लीजिए ,

हँसी चारों तरफ़ अपने बिखरी पड़ी
सब से संवाद कर बस उठा लीजिए
कितनी कीमती हँसी तत्व है जान लें
इसको बेहतर बनाकर हँसा कीजिए ,

सुप्तावस्था में हैं क्यूँ हँसी के सामान
उसको स्फूर्त कर फिर जगा लीजिए
खोल के होंठ के चुप्पियों की सांकल
ऐसा दिल-गुदाज मन्जर बना लीजिए ,

कभी दौड़ती भागती ज़िन्दगी से इतर  
खुद की परवाह भी तो किया कीजिए
कितनी नीरस लगे बिन हँसी ज़िन्दगी
इस कदर चुप ना तनहा रहा कीजिये ,

खिले होंठों पे शतदल कमल सी हँसी
गुलाब की पाँखुरी सी महका कीजिए
हँसी ज़ख्मे-ज़िगर की दवा मुस्तक़िल
बनाके शरबत हँसी को पीया कीजिए ,

इक दिन महरूम हो जाएगी ज़िन्दगी
क्या पता था कभी इक तबस्सुम लिए
वॉट्सऐप,फेसबुक,चैटों,की गतिविधि
पर होगी कुर्बान हँसी भी सदा के लिए ,

फिर से जीवन्त बना ज़िन्दगी साथियों
हँसी का झरना भी निर्झर बहा दीजिए
बिडम्बनायें कोई या विसंगति हो कोई 
हास्य सब में छिपा बस परखा कीजिए |

दिल-गुदाज ---गुदगुदाने वाला

                            शैल सिंह



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें