शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2015

दिल की बात शायरी हो गई

दिल की बात शायरी हो गई 


           [ १ ]
बुझे   हुए  चराग़  से   जैसे
धुवाँ   का   भभका  उठे   है
मुद्दत से बसी इस सीने में
इक याद तन दहका उठे है ,
           [ २ ]
ज़ख़्मों  के   निशां  मिट  जाएं
कब  मरहम  ही  लगाया  मैंने
दाग़  बेवफ़ाई  के रख  छोड़ा है
उनके क़ुरबत को सजाया मैंने,
          [ ३ ]
कह  गए लौट  कर आने  की बात
हम दिल का चराग  जलाये बैठे हैं
जाने कितनी सच्चाई इस बात में
वो बात हम दिल से लगाये बैठे हैं ।
             [ ४ ]
हाँ,डर लगता नहीं मुझे अंधेरों से
मैं कहाँ,कब,कभी अकेली होती हूँ
इक याद के सहारे,ग़म छिपा सीने में 
जी भरके तन्हाई,तन्हाई में जी लेती हूँ ।

                                          शैल सिंह